जनकपुर धाम में प्रभु श्रीराम का मना तिलकोत्सव

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देश-विदेश (TV  News India): नेपाल/जनकपुरधाम विवाहपंचमी के अवसर पर जनकपुरधाम में आयोजित होने वाले राम-जानकी विवाहोत्सव को लेकर हर तरफ गजब का उत्साह है। चौथे दिन शुक्रवार को प्रभु श्रीराम का तिलकोत्सव हुआ। इस मौके पर नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी न भी शिरकत की। शुक्रवार को सेना के हेलीकॉप्टर से जनकपुर पहुंचीं राष्ट्रपति भंडारी ने अयोध्या से जनकपुर आए बरातियों का स्वागत किया।

जनकपुर के बरबीघा मैदान में भव्य पंडाल में राष्ट्रपति ने बरातियों के साथ प्रभु श्रीराम व माता जानकी की झांकी का स्वागत किया। उनके साथ संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री योगेश भट्टराई, भूमि सुधार व्यवस्था मंत्री पद्यमा अर्याल भी तिलकोत्सव भी शामिल हुए। नेपाल के अलावा भारत व दूसरे देशों से विश्व हिदू परिषद के माहामंत्री राजेंद्र सिंह’पंकज’के नेतृत्व में लगभग 500 सौ साधु-संत पहुंचे हुए हैं। उनमें से, 50 उच्चश्रेणी के संत-महंत शामिल हैं। उनके अनुसार, अयोध्या के महंत कन्हैया दास मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पिता व दशरथ की भूमिका में डॉ. रामेश्वर दास हैं।

जनकपुरधाम में श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव को लेकर हर तरफ भक्तिभाव व उत्साह का माहौल है। शनिवार को मां जानकी का मटकोर होगा। इससे पहले, जानकी मंदिर के महंत रामतापेश्वर दास सीता और जनकपुर के राममंदिर के महंत राम दास ने राम के पिता की भूमिका निभाई थी। इस वर्ष अयोध्या के महंत कन्हैया दास दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। ऐलै शुभ के लगनमा शुभे हो शुभे…’ अर्थात् कि जब पुनर्मिलन का समय आया, हर जगह शुभकामनाएं। जनकपुर वर्तमान में इस तरह के विवाह गीत से संबंधित लोक गीत खूब सुनाई पड़ रहे हैं। ऐसा लगता है कि पूरा जनकपुर एक परिवार है और परिवार में एक ही बेटी है। राम और सीता का विवाह त्रेता युग में जनकपुर में हुआ था। रविवार को श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव मन रहा है। 551 महिलाएं सिर पर तिलक के सामान लेकर पहुंची।

राम-जानकी विवाहोत्सव के अवसर पर आयोजित होने वाले सात दिवसीय महत्वपूर्ण समारोहों में से एक है। यह जानकी मंदिर से पांच सौ मीटर की दूरी पर राम मंदिर परिसर में आयोजित होता है। तिलकोत्सव के लिए, जानकी मंदिर से राम मंदिर तक 551 महिलाएं भार के रूप में सिर पर विभिन्न प्रकार के फल, मिठाई, कपड़े व श्रृंगार आदि के सामान टोकरी में लेकर जाती हैं। वहां, स्थानीय धर्मपरायण महिलाएं उन लोगों का स्वागत करती हैं जो अपने बेटे की शादी के लिए लोक गीत गाकर लड़की पक्ष से आते हैं। हंसी-ठिठोली के बीच मैथिली परंपरा के अनुसार, उनके गालों पर दही पहनने, निचोड़ने और मजाकिया लहजे वाले स्वागत गीत गाने की प्रथा है। बैंडडबाजा के साथ इस टीम की कमान जानकी मंदिर के महंत रामतापेश्वर दास ने संभाली। राम मंदिर के महंत राम दास उनका स्वागत किए। तिलकोत्सव के मद्देनजर सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी है।

POSTED by:-Ashish Jha

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