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क्यों लोग महाभारत काल के गंडेश्वर महादेव को लोग भूलते जा रहे हैं ।

रिपोर्टर : आलोक कुमार ( मधुबनी)

TV NEWS INDIA MADHUBANI : महाभारत कालीन का शिवलिंग को आज भी पूजा अर्चना होती है । यहाँ के शिवलिंग को जब अर्जुन ने तपस्या करने आये थें और उसे भगवान शिव ने खुश होकर धनुष और बाण लौटाएं थे । अर्जुन ने ही इस शिवलिंग का नाम गंडेश्वर नाथ महादेव रखा था और आज भी इस स्थान पर श्रद्धा पूर्वक आते हैं तो उसकी मनोकामना पूरी होती है ।

मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड अंतर्ग्रत शिवनगर गाँव में महाभारत कालीन से ही गंडेश्वर नाथ महादेव है । जो की कोई भी भक्त श्रद्धा पूर्वक उनकी दर्शन करते हैं तो उनकी मनोकामना पूरी होती है । लेकिन इतने लंबे समय से है गंडेश्वर महादेव को भी देखने वाला नही है । कहा गया है कि महादेव “देवों के देव” हैं । इनकी इच्छाओं के बिना किसी का भी कोई काम नही बनता है । फिर यह महादेव क्यों वीरान सा है । जबकि इस गाँव के कितने लोग आईएएस , आईपीएस और सरकार में मंत्री बने । फिर ऐसा क्यों हो रहा है जो गंडेश्वर महादेव को लोग भूलते जा रहे हैं । यहाँ के लोग प्रयासरत है कि जिस तरह कालिदास महोत्सव हुआ था । उसी प्रकार से गंडेश्वर महादेव महोत्सव हो ।

यह गंडेश्वर महादेव सरकार की उपेक्षा का शिकार होते जा रहे हैं । जबकि इनके कृपा से इस गाँव में कई लोगों को मन चाहा फल प्राप्त हुई थी और हो भी रही है । विधान सभापति पंडित ताराकांत झा भी इसी गांव के रहने वाले थे और बचपन में इस महादेव की खूब पूजा अर्चना करते थे और इनके ही दया दृष्टि से सभापति बने थे । फिर लोग गंडेश्वर महादेव को क्यों भूलते जा रहे हैं , अगर किसी को इनकी महिमा के बारे में पता होता तो इनको चारों मुख्य विकास की गंगा बहती रहती ।
वहीँ गंडेश्वर महादेव के मुख्य पुजारी ने बताया कि सभापति जी सिर्फ अपनी ही विकास किये । जो की पंडित ताराकांत झा से मणि ताराकांत झा हो गए ।

अर्जुन की बाण इसी जगह पर भगवान शिव ने लौटाई थी । जब एक परीक्षा के घड़ी थी उस समय और एक तरफ भगवान शिव और दूसरी तरफ अर्जुन युद्ध लड़ रहे थे । उसके बाद अर्जुन की धनुष और बाण दोनों को छीन लिया गया था । फिर जाकर भगवान् शिव की आराधना की और महादेव ने खुश होकर फिर से बाण लौटा दिया । तब से अर्जुन ने महादेव को गंडेश्वर महादेव के नाम से प्रचलित कर दिया । लेकिन महादेव के दर्शन करने के लिये आपको बड़ी कठिन रास्ता अपनाना पड़ता है । क्योंकि यहाँ के जनप्रतिनिधि और सरकार सिर्फ अपना ही विकास करना समझा है ।

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