उत्तर प्रदेश के दो शहरों में अब पुलिस कमिश्नर सिस्टम; योगी बोले- पुलिस सुधार के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण :

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उत्तर प्रदेश (TV News India): उत्तर प्रदेश में पहली बार लखनऊ व गौतमबुद्धनगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा) में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू किया गया है। इसमें एडीजी रैंक के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया जाएगा। डीआईजी रैंक के दो जॉइंट पुलिस कमिश्नर होंगे। एक ज्वाइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर देखेंगे जबकि दूसरा पुलिस मुख्यालय का कामकाज देखेंगे। लखनऊ में सुजीत पांडेय व नोएडा में आलोक सिंह को पहला पुलिस कमिश्नर बनाया गया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इससे पहले मायावती सरकार में भी पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग उठी थी। हालांकि, तब ऐसा नहीं हो सका था। कैबिनेट बैठक के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- विशेषज्ञों ने पुलिस व्यवस्था में सुधार के लिए समय-समय पर सुझाव दिए। लेकिन समय से क्रियान्वयन न होने की वजह से न्यायपालिका ने हमेशा सरकार को कटघरे में खड़ा करती थी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कमिश्नर सिस्टम को लागू करने की जरुरत काफी समय से महसूस की जा रही थी।

लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। सीएम ने कहा- 2011 की जनगणना के अनुसार लखनऊ की आबादी 40 लाख है। उन्होंने बताया कि कमिश्नर सिस्टम में एडीजी रैंक के अधिकारी को आयुक्त बनाया जाएगा। महिला एसपी व एएसपी रैंक की अधिकारी की अलग से नियुक्ति होगी। एसपी व एएसपी रैंक के अधिकारी को भी नियुक्ति मिलेगी, जो यातायात व्यवस्था संभालेगा। गौतमबुद्धनगर की वर्तमान आबादी 25 लाख है। शहर आर्थिक राजधानी के तौर पर आगे बढ़ रहा है। एडीजी स्तर के अलावा यहां डीआईजी स्तर के दो अधिकारी, पांच एसपी रैंक के अधिकारी उनके साथ रहेंगे। एक महिला अधिकारी तैनात होगी, जो महिलाओं से जुड़े मामले देखेगी। एक पुलिस अधीक्षक स्तर का अधिकारी यातायात को संभालेगा। वहां पर पुलिस आयुक्त प्रणाली में कुछ नए थाने बनाने की आवश्यकता होगी। दो नए थाने तत्काल प्रभाव से बनाए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर के पास कुछ मैजिस्ट्रेटियल पॉवर दिए जाते हैं। भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 व दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में पुलिस आयुक्त प्रणाली का जिक्र है। जिन शहरों की आबादी 10 लाख से अधिक है, वहां पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की जा सकती है। इससे सीआरपीसी की मजिस्ट्रियल पॉवर वाली जो कार्रवाई अब तक जिला प्रशासन के अफसरों के पास थी, वह सभी मैजिस्ट्रेटियल पावर पुलिस कमिश्नर को मिल जाएंगी। यानी सीआरपीसी में 107-16, धारा 144, 109, 110, 145 के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पुलिस को मिल जाएंगी।

बेऔ

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