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दूध में मिलावट – आख़िर कहां गया दूध ?

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सवाल ? जिन ग्वाला से हम सभी नित्य सच्चा और असली दूध अधिक दामों में खरीदते थे क्या वह सही था ?

जानकारी के लिए बता दें भारत में लॉक डाउन की वजह से सभी मिठाई की दुकानें बंद हैं और सभी रेस्टोरेंट भी बंद है इतना ही नहीं चाय की दुकानें ठेले बंद है साथ ही साथ विवाह पार्टियां भी बंद है तो फिर इनमें खपने वाला हजारों लीटर दूध आज कहां है ? क्या असली दूध देने वाली गाय एवं भैंस अपना दूध लॉक डाउन की वजह से बंद कर दी हैं या फिर नकली दूध बेचने वाले बनाना बंद कर दिए हैं यह सवाल सभी के लिए प्रश्न चिन्ह बना हुआ है !

*पूर्व में निर्मित मिठाईयो से खतरा*

इतना ही नहीं आने वाले दिनों में जल्द ही एक बड़ा संकट मंडरा रहा है अर्थात जितने भी मिठाई की दुकानें हैं लॉकडाउन की वजह से पूर्व में निर्मित मिठाईयां दुकानों में बंद है और जब लॉक डाउन खत्म होगा तो वही दुकानदार उन्हीं मिठाइयों को फिर से हम सभी को बेचेंगे जिससे एक नई बीमारी का प्रारंभ होगा !

दूध नहीं जहर पीता है इंडिया, उत्पादन 14 करोड़ लीटर लेकिन खपत 64 करोड़ लीटर

एनिमल वेल्फेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के मुताबिक, देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी दूध और दूध से बना प्रोडक्ट मिलावटी है। यह फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से तय मानकों ने कहीं भी मेल नहीं खाता है। अहलूवालिया के मुताबिक, भारत में मिलावट के लिए ऐसी चीजों का इस्तेमाल होता है जो सीधे तौर पर आकी सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। आम तौर पर देश में जिन चीजों की मिलावट से दूध और दूध के प्रोडक्ट तैयार किया जाता है उनमें डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, ग्लूकोज, सफेद रंग और रिफाइंड ऑयल शामिल है।

एनीमल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य मोहन सिंह अहलूवालिया के मुताबिक, देश में बिकने वाला 68.7 फीसदी दूध और दूध से बना प्रोडक्ट मिलावटी है। यह फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से तय मानकों से कहीं भी मेल नहीं खाता है।

*खपत से 68% कम होता है उत्पादन*

साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के एक बयान का हवाला देते हुए अहलूवालिया ने कहा कि मिलावट वाले करीब 89 फीसदी प्रोडक्ट में एक या दो तरह की मिलावट होती है। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2018 देश में दूध का कुल उत्पादन 14.68 करोड़ लीटर रोजाना रिकॉर्ड किया गया, जबकि देश में दूध की प्रति व्यक्ति खपत 480 ग्राम प्रति दिन ठहरती है। सीधे तौर पर यह गैप करीब 68 फीसदी का ठहरता है।

*उत्तरी राज्यों में मिलावट के ज्यादा मामले*

अहलूवालिया के मुताबिक, दक्षिणी राज्यों के मुकाबले उत्तरी राज्यों में दूध में मिलावट के ज्यादा मामले सामने आए हैं। दूध में मिलावट को लेकर कुछ साल पहे देश में एक सर्वे हुआ था। इसमें पाया गया कि दूध को पैक करते वक्त सफाई और स्वच्छता दोनों से खिलवाड़ किया जा रहा है। दूध में डिटर्जेंट की सीधे तौर पर मिलावट पाई गई है। अहलूवालिया के मुताबिक, यह मिलावट सीधे तौर पर लोगों की सेहत के लिए खतरा है। इसके चलते उपभोक्ताओं के शारीरिक अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

*भारत में दूध का उत्पादन*

भारत गांवों में बसता है। हमारी ७२ प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ग्रामीण है तथा ६० प्रतिशत लोग कृषि व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। करीब ७ करोड़ कृषक परिवार में प्रत्येक दो ग्रामीण घरों में से एक डेरी उद्योग से जुड़े हैं। भारतीय दुग्ध उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण सांख्यिकी आंकड़ों के अनुसार देश में ७० प्रतिशत दूध की आपूर्ति छोटे/ सीमांत/ भूमिहीन किसानों से होती है। भारत में कृषि भूमि की अपेक्षा गायों का ज्यादा समानता पूर्वक वितरण है। भारत की ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में डेरी-उद्योग की प्रमुख भूमिका है।

*देश में सामाजिक-आर्थिक* परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में इसे मान्यता दी गई है। कृषि और डेरी-फार्मिंग के बीच एक परस्पर निर्भरता वाला संबंध है। कृषि उत्पादों से मवेशियों के लिए भोजन और चारा उपलब्ध होता है जबकि मवेशी पोषण सुरक्षा माल उपलब्ध कराने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पादों दूध, घी, मक्खन, पनीर, संघनित दूध, दूध का पाउडर, दही आदि का उत्पादन करता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारत का अपना विशेष स्थान है और यह विश्व में सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक और दुग्ध उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। संयोग से भारत विश्व में सबसे कम खर्च पर यानी २७ सेंट प्रति लीटर की दर से दूध का उत्पादन करता है (अमरीका में ६३ सेंट और जापान में २.८)। यदि वर्तमान रूझान जारी रहता है तो मिनरल वाटर उद्योग की तरह दुग्ध प्रोसेसिंग उद्योग में भी बहुत तेजी से विकास होने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। अगले १० वर्षों में तिगुनी वृद्धि के साथ भारत विश्व में दुग्ध उत्पादों को तैयार करने वाला अग्रणी देश बन जाएगा।

*रोजगार की संभावनाएं* इस उद्योग के तहत सरकारी और गैर- सरकारी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मौजूद हैं। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) विभिन्न स्थानों पर स्थित इस क्षेत्र का प्रमुख सार्वजनिक प्रतिष्ठान है, जो कि किसानों के नेतृत्व वाले व्यावसायिक कृषि संबंधी कार्यों में संलग्न है। देश में अब ४०० से अधिक डेरी संयंत्र हैं जहाँ विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उन्हें संयंत्रों के दक्षतापूर्ण संचालन के वास्ते सुयोग्य और सुप्रशिक्षित कार्मिकों की आवश्यकता होती है।

सवाल तो अब भी वही है जिन ग्वाला से हम सभी नित्य सच्चा और असली दूध अधिक दामों में खरीदते थे क्या वह सही था ?

*विशेष संवाददाता*
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