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समाजसेवी-कर्मवीर भाऊराव पायगोंडा पाटिल (जन्मदिन पर विशेष)

Exclusive (TV News India): कर्मवीर  भाऊराव   पायगोंडा  पाटिल नि:स्वार्थ भाव से काम करने वाले एक समाजसेवी तथा शिक्षाप्रसारवादी थे, उनका जन्म 22 सितम्बर 1887 को महराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले में हुआ था।

उस समय जब जैन समाज में बहुत कम लोग शिक्षित हुआ करते थे, भाऊराव ने 8वीं तक शिक्षा प्राप्त की, वे छत्रपति शिवाजी के विचारों और जीवनी से बहुत प्रभावित थे। उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कोल्हापुर शहर भेज दिया, जहां वे ‘सत्य शोधक आंदोलन’ के सम्पर्क में आए और यहीं से उनमें वैचारिक परिवर्तन हुआ। उन्होंने शिक्षा के प्रचार प्रसार का बीड़ा उठा लिया, वे महाराष्ट्र प्रांत के शैक्षिक क्रांति के जनक माने जाते हैं। उन्होंने शिक्षा को जनसामान्य तक पहुँचाने के लिए ‘पढ़ाई के साथ कमाई’ का सिद्धान्त लागू किया। भारत में कर्मवीर भाऊराव पाटिल के नाम से संचालित सबसे बड़ी रैयत शिक्षण संस्थान है, जिसकी लगभग 1000 शाखाएँ हैं। उन्होंने संकल्प लिया था कि मेरी दाढ़ी में जितने बाल हैं, मैं उतने स्कूल खोलूँगा। स्वयं वे जीवन भर नंगे पैर चले, और गाँव-गाँव जाकर गरीब असहाय बच्चों को शिक्षा से जोड़ा, उनका भविष्य उज्जवल किया। इस शैक्षिक क्रांति में उनकी पत्नी का अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान था। अपने यहाँ चल रहे बोर्डिंग में पढ़ने वाले छात्रों को त्यौहार के समय खिलाने के लिए जब एक भी अन्न का दाना नहीं था और भाऊराव क़हीं बाहर गये हुए थे, तो उन्होंने अपना मंगलसूत्र बेचकर बच्चों के भोजन की व्यवस्था की। उनके द्वारा शिक्षा का अलख जगाने के प्रति समर्पण को देखते हुए पूना विश्वविद्यालय ने उन्हें डी. लिट् की उपाधि प्रदान की। भारत सरकार ने भाऊराव पाटिल को 1959 में पद्म भूषण उपाधि से सम्मानित किया। उनके सम्मान में डाक तार विभाग द्वारा मई 1988 में डाक टिकट जारी किया गया।

आज उनकी जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन।

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