झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को शिक्षित कर रहे 5 दोस्त

नई दिल्ली राइट टू एजुकेशन का अधिकार हर किसी को है. हर कोई चाहता है अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर एक शिक्षित इंसान बनाए. दिल्ली के मयूर विहार के पास बने फ्लाईओवर के नीचे एक ऐसा ही स्कूल चल रहा है, जहां आसपास झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने के लिए कुछ दोस्त मिलकर काम कर रहे हैं. इस स्कूल में न तो कोई ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाती है और न ही यह कोई हाईटेक स्कूल है. फ्लाईओवर के नीचे फर्श पर बैठे बच्चों का जज्बा ठीक उसी तरीके से है जैसा बड़े- बड़े स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का होता है. लॉकडाउन के कारण लंबे समय से स्कूल बंद पड़े हुए हैं और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए कुछ दोस्तों ने मिलकर फ्लाईओवर के नीचे एक क्लास लगाई और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
नोएडा के स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर पीएस रघुवंशी ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर इस स्कूल की शुरुआत की है. पीएस रघुवंशी ने बताया कि जब उन्होंने देखा कि झुग्गियों में रहने वाले लोगों के बच्चे पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन कोई जरिया नहीं है. तब उन्होंने इस स्कूल की शुरुआत की. शुरुआत में चार पांच बच्चे थे और अब धीरे-धीरे बढ़कर स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या 45 से 50 हो गई है।
उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार हर किसी को है और इसीलिए हम मिलकर बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं. इसके साथ ही बच्चों को फिट रहने का मूल मंत्र भी सिखाया जाता है योगा एक्सरसाइज एक्टिविटी भी इन बच्चों को कराई जाती है, ताकि यह बच्चे हर क्षेत्र में होने वाली चीजों को समझ सके।

इसीलिए वह उनके क्लास रूम में आते हैं
उन्होंने बताया कि हम बच्चों को किताब कॉपी पढ़ने से जुड़ी हुई जो चीजें हैं अपने पैसों से मिलकर समय-समय पर देते रहते हैं. कुछ लोग भी हमारी मदद करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन बच्चों के मां-बाप के पास न तो बड़े- बड़े महंगे मोबाइल फोन हैं और न ही वह इतने शिक्षित हैं कि उन्हें फोन पर पढ़ा सकें. स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों ने कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत मजा आता है और उनके सर उन्हें बहुत सारी चीजें सिखाते हैं. फ्लाईओवर के नीचे बने छोटे से क्लास रूम में पढ़ाने वाले टीचर ने बताया कि वह खुद भी पढ़ रहे हैं और उन्होंने देखा कि जब उनके सर बच्चों को पढ़ाने का यह काम कर रहे हैं तो धीरे-धीरे उनके चार-पांच दोस्त उनके सर के साथ जोड़कर बच्चों को पढ़ाने लगे. अभी बच्चों को बेसिक शिक्षा दी जा रही है और कई सारे बच्चे एमसीडी के स्कूलों में भी पढ़ते हैं. लेकिन फिलहाल स्कूल बंद है, इसीलिए वह उनके क्लास रूम में आते हैं।