s

0
31
कुछ एहसास कविताओं के साथ

हम जीवन के महाकाव्य हैं
केवल छ्न्द प्रसंग नहीं हैं।

कंकड़-पत्थर की धरती है
अपने तो पाँवों के नीचे
हम कब कहते बन्धु! बिछाओ
स्वागत में मखमली गलीचे

रेती पर जो चित्र बनाती
ऐसी रंग-तरंग नहीं है। …

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here