मां पाटन देवी का चैत्र नवरात्र मेला, महीने भर शहर में रोज होती है दिवाली

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उत्तर प्रदेश (TV NEWS INDIA) : मां पाटन देवी का चैत्र नवरात्र मेला, महीने भर शहर में रोज होती है दिवाली
भारत के धार्मिक मानचित्र में 51 शक्तिपीठ में एक पीठ देवीपाटन जनपद बलरामपुर के तहसील तुलसीपुर के नाम में अंकित है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सती का स्कंध यहां शिव तांडव के दौरान गिरा था इसीलिए इसे पाटन कहा जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से देवीपाटन मंदिर पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग से भी सीधे तुलसीपुर पहुंचा जा सकता है।

लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर पर्यटक स्थल श्रावस्ती पर हवाई पट्टी लगभग तैयार हैं जो संभवता इसी वर्ष प्रभावी हो जाएगा जिससे अन्य प्रांतों से आने वाले भक्तों को हवाई सुविधा भी मिल सकेगी ।श्रावस्ती से सीधे देवीपाटन के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। देवीपाटन मंदिर की बारे में मान्यता है यदि भक्त एक बार माँ का दर्शन प्राप्त कर लेता है तो बार बार आने को अपने को रोक नहीं पाता है ।भक्तों की मनोकामना निश्चित रुप से पूर्ण होती है क्योंकि यह सिद्धपीठ है जिसकी पूजा बड़े ही भाव से वे कठिन दौर से गुजर कर पुजारी करतें हैं। पूजा के दौरान तंत्र मंत्र का विशेष स्थान है। मां की पूजा विशेष रुप से प्रशिक्षित पुजारी अर्ध रात्रि से प्रातः4:00 बजे तक तथा अपरान्ह से सांय 6बजे तक कुल 108 आसन में मुँह नाक बंद कर तथा गर्भग्रह पूजा के दौरान आंख में पट्टी बांध कर नित्य पूजा पुजारी करते हैं । नगाड़े वह घंटे पूजानुरूप ही बजते हैं।

प्रातकाल सूर्य की किरण मां के चरणों को स्पर्श करती है ।पास में ही भैरों नाथ की अखण्ड धूनी है।माँ के दर्शन पश्चात लोग वँहा भी नमन वन्दन आशीर्वाद हेतु दर्शन करने जाते हैं।वँहा सिर ढककर अर्चना की जाती है।उसी धूनी पर माँ के चढ़ावे व भोग के लिए ढाई किलो आंटे काले मिर्च व जीरा मिलाकर रोट बनाया जाता जो भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है।इसके इतर भगवान शिव की शिवलिंग भी सम्मुख मुख्यद्वार पर स्थापित है। दानवीर कर्ण ने बगल में ही स्थापित सूर्य कुंड पर तपस्या की थी।कहा जाता है कुष्ठ रोगियों के लिए सूर्यकुंड का जल किसी वरदान से कम नही।सूर्यकुंड में स्नान से कुष्ठ रोग का नाश होता हैं और रोगी को पुनः नवीन काया प्राप्त होती है।सामान्य जन भक्त भी स्नान कर शरीर को स्वस्थ्यता प्राप्त करते हैं।

मन्दिर का भव्य गौशाला अत्यंत महत्वपूर्ण है।महन्थ मिथिलेश नाथ की प्रारंभिक दिनचर्या गऊ को भोजन कराने के साथ नित्य प्रारम्भ होती है।गउओं को बांधा नही जाता है।खुल्ला गऊ दिनभर गौशाले में विचरण करते हैं।सभी गायों के लिए नादा स्थापित है।महन्तश्री प्रवेश करते ही नामकरण होने से नाम लेकर पुकारते हैं और गऊ सीधे भागती हुई स्नेहिल भाव से भोजन के लिए लिपट जाती हैं।देवीमन्दिर में जलते अखण्ड दीप के राख को काजल बना कर भक्त महिलाएं माँगकर ले जाती हैं और अपने नौनिहालों के आंख में वही काजल लगा कर आंखों की सुरक्षा करती हैं।इससे दृष्टि निरोग रहती है ऐसा प्रत्यक्ष दर्शी बताते हैं।गुरु गोरक्षनाथ कि भी यह तपस्थली रही है। घोर तपस्या के दौरान उनके शरीर को दीमक चाटने लगते थे जिससे उन्हें असह्य पीड़ा होती थी परन्तु वो तबतक तपस्या में लीन रहते थे जबतक माँ स्वयं प्रकट नही हो जाती थी।एकबार गुरु गोरखनाथ ने मां से यह पीड़ा बताई तो उन्हें विशेष प्रकार का लेप शरीर मे लगाकर ध्यान करने को कहा जिससे शरीर को दीमक नही चाट पाएंगे।

तभी से लेप लगाकर उन्होंने तपस्या प्रारम्भ कर दी फिर उन्हें माँ की शक्ति भी प्राप्त हुई।गुरु गोरक्षनाथ की तपस्थली के कारण ही यह मंदिर नाथ सम्प्रदाय की देखरेख में संचालित होने लगा।पूर्व में राज बलरामपुर देखरेख करता था।वर्तमान समय में देवीपाटन मन्दिर का सम्पूर्ण संचालन नाथ सम्प्रदाय के अध्यक्ष एवम गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कर रहे हैं।देवीपाटन मन्दिर के वर्तमान महन्थ योगी मिथिलेश नाथ ने मन्दिर की भव्यता एवं मेले के विकास पर पूरी शक्ति लगा दी है।मन्दिर परिधि पूरे वर्ष भक्तों की विशेष आवागमन से परिपूर्ण रहता है।हजारों परिवार की जीविका भी चलती है।नवनिर्मित समय माता का मंदिर भी अनावरण के लिए तैयार है।सम्भवतः मा0 मुख्यमंत्री जी 10अप्रेल को सम्भावित आगमन के दौरान अनावरण भी कर सकतें हैं।मन्दिर के संरक्षण में तो यों तो अनेक मन्दिर संचालित है पर तुलसीपुर नगर में कुकरहा बाबा मंदिर की ख्याति एक अलग है।कुत्ते के काटने पर पूर्व में पुजारी द्वारा एक आध्यात्मिक रूप से तैयार विशेष लेप लगाने पर कुत्तों का विषाणु जहर खत्म हो जाता था ऐसा बताया जाता है।

ग्रीष्मकालीन नवरात्रि आज 6अप्रेल से प्रारंभ होकर 13अप्रेल को मन्दिर में पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न होगा।इस दौरान पंचमी तिथि को मित्र राष्ट्र नैपाल से पीर रतननाथ जी की भव्य शोभायात्रा नैपाल से देवीपाटन मन्दिर में आयेगी।आने के पश्चात पौराणिक मान्यताओं अनुरूप माँ की भक्ति से सिद्धिप्राप्त रतननाथ जी प्रवेश द्वार पर विराजमान होंगे और नवमी तिथि तक उनकी विशेष पूजा अर्चना होगी।मंदिर परिसर में स्थापित भव्य हवन यज्ञ कुंड में पूर्णाहुति होगी।

डेढ़ माह तक सुप्रसिद्ध मेला मन्दिर परिक्षेत्र में चलता है।जो वर्तमान सरकार के अनुकम्पा से शासकीय मेला का दर्जाप्राप्त कर चुका है।देवीपाटन पर्यटन स्थल का भी दर्जाप्राप्त कर चुका है।मेले के लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है।दो लेन की सड़क भी लगभग बलरामपुर चौराहे से सिरिया तट तक बन चुकी है।मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने तैयारी कर ली है।

मेला का प्रभार वरिस्ठ उपनिरीक्षक सुरेश वर्मा को सौंपा गया है जिनका कुशल संचालन पूर्व में पूर्ण करने के कारण सर्वविदित है।पुलिस महिला पुलिस गोताखोर अग्निशमन दल वाहन पीएसी सहित एसएसबी के जवान डॉग स्क्वायड आदि की उपस्थिति भी सुनिश्चित हो चुकी है।मन्दिर प्रशासन ने 29 सीसीटीवी कैमरा प्राइवेट सफाई कर्मी सरकारी 50सफाई कर्मी 46 उपयोग में आने वाले पानी के लिए हैंडपंप 24घण्टे बिजली व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से सम्पूर्ण स्वास्थ्य रक्षक दल नगर पंचायत द्वारा रैन बसेरा फॉगिंग व पानी छिड़काव आदि की पूर्ण तैयारी कर ली गई है।

देवीपाटन मन्दिर महन्थ योगी मिथिलेश नाथ पूरे मनोवेग से मन्दिर व मेले का संचालन निष्पादित करते हैं।अपने मृदभाषी वक्तव्य क्रोध से कोसों दूर सम्पूर्ण धीरज व धैर्यता उनकी विशिष्ट पहचान बन चुकी है।सम्पूर्ण पूजन अर्चन पश्चात भक्तगण उनका आशीर्वाद प्राप्त करने उनके कक्ष में जाने से नही चूकते।मन्दिर परिसर की भव्यता रोशनी से नहलाने की इस बार की पहल अलग रूप दे रही है।

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