डिजिटल बाबा का कुम्भ में युवाओ साथ संवाद का अनोखा अंदाज

0
207

व्यक्त्ति-विशेष (टीवीन्यूज़इंडिया) : वैसे तो कुम्भ मेला में भाति-भाति के अनेक रंग-बिरंगे बाबा नज़र आये पर डिजिटल बाबा का रूप, अंदाज जीवन शैली आज के दौर में बेहद प्रासंगिक हैं। सेल्फी स्टिक,ट्राइपॉड,आई फोन, लैपल माइक, न जाने क्या क्या छोटे-बड़े नाना प्रकार के गैजेट्स अपने बैगपैक में भर कर हमेशा पीठ पर ले कर घूमते रहते है, फेसबुक, यूट्यूब, इंटाग्राम, ट्विटर ,रोपोसो, पर आम लोगो से सर्वांगीण विषय पर चर्चा करते समय लाइव होते रहते हैं। सबसे अहम बात ये कि ये सारा साजो सामान डीजी बाबा के चाहने वालो ने गिफ्ट किया हैं अभी हाल में बीते कुम्भ मेला के दौरान बाबा के एक फेसबुक फालोवर ने सोनी का 4k कैमकॉडर nx 80 जो एकदम लेटेस्ट है कीमत एक लाख तीस हज़ार है बाबा जी को गिफ्ट किया। सबसे अच्छी बात ये कि ये बाबा धार्मिक जंजालो में न खुद जकड़े न ही किसी भक्त को जकड़ते है मित्रवत सबसे मिलना, बात-चीत के जरिये अनुभवों का आदान प्रदान करना वो भी एक जिज्ञासु भाव से इसी कारण डीजी बाबा आज के यूथ को पसंद आने लगे हैं।बाबा धर्म में फैले आडम्बर पाखंड पर जोरदार प्रहार करते है हर विषय पर बेबाकी से निःसंकोच हो कर अपनी राय रखते है,जिस विषय में संदेह होता है उस विषय में अध्ययन करते है फिर बात करते है। 

Image result for digital baba image

डिजिटल बाबा के कार्यशैली, व्यक्तित्व में सबसे ख़ास बात ये दिखी की कुम्भ में आने वाले लोगो से चौराहे पर खड़े होकर युवा, बच्चों व श्रद्धालु जन से मुखातिब हो कर धर्म, आध्यात्म, भारतीय दर्शन, जीवनमूल्य ,सनातन शास्त्रों के बारे में लोगो को बताते रहे साथ ही इनमे छुपे ज्ञान को सुनने समझने के लिए सबको प्रेरित करते रहे। डिजिटल बाबा का मानना है कि समय के साथ हमें चलना होगा तभी दुनियाँ के लोगो से आँख मिला कर हम अपने योग्यता को दिखा सकेंगे पर ध्यान ये भी रखना होगा कि अपने जड़ो से जुड़े रहे डिजिटल बाबा स्वामी राम शंकर अपने  पेज https://www.facebook.com/swamiramshankardas/ पर कुम्भ के विभिन्न दृश्यों को लाइव कर दुनिया भर में खार कर युवाओ के मध्य पहुँचाये बाबा का मानना है की कुम्भ तक युवा पहुंचे या न पहुंचे पर युवाओं तक कुम्भ का पहुँचना बहुत जरुरी है।

डिजिटल बाबा ने बताया कि कुम्भ में आने का मुख्य प्रयोजन यह है कि धर्म आस्था के इस महामेला में आने वाले युवा वर्ग से मुखातिब हो सकू उनसे बात करके ये जान सकू कि आज की पीढ़ी धर्म, अध्यात्म रोजगार, जीवन दर्शन व भारतीय संस्कृति को किस रूप में समझ रही हैं कुम्भ में युवाओ से जो भी हमारी बात हो रही हैं उसे अपने फेसबुक पेज यूट्यूब चैनल जो स्वामी राम शंकर के नाम से हैं उस पर लाइव करते रहे हमारा प्रयास हैं की युवा पीढ़ी को आध्यात्मिक ज्ञान से हमारे व्यवहारिक जीनव में होने वाले लाभ को बता सकू, चूकि साधू के रूप में जब कोई सामने दिखाई देता हैं तो युवा किनारा कर लेते हैं पर मेरे साथ वो आसानी से जुड़ जाते हैं इसका सबसे बड़ा वजह ये हैं कि हम हमारे बीच जेनरेशन गैप नही आता हम उन्हें ज्ञान देने की जगह उनसे मैत्री भाव स्थपित करते हैं। 

मैं जानता हूँ कि यदि कोई एक बार जुड़ जायेगा तो हमारे विषय से भी खुद ब खुद जुड़ा रहेगा ये एक बड़ी बिडंबना है कि धर्म आध्यात्म से होने वाले आर्थिक लाभ के कारण बहुतायत की संख्या में लोग इस विधा को व्यवसाय बना लिये हैं कथा प्रवचन योग ध्यान ये सेवा परोपकार जनकल्याण आत्मकल्याण के विषय हैं किंतु निजी स्वार्थ के कारण  इन बातों को दरकिनार करते हुये लोग इसे व्यवसाय बना दिये हैं। आज कल  केवल दुसरो को ज्ञान देने का ठेका लेकर लोगो को ज्ञान दे रहे है खुद में अमल करने पर कोई जोर नही दे रहा हैं इसी कारण हमारे सामने धर्मधुरंधर धर्म ध्वजी अनेक पाखंडी लोगो की असलियत सामने आ रही है, लोग ठगे से अनुभव कर रहे हैं। 

सन्देश वाहक होना आसान नही है पहले अपने विचारों पर स्वयं अमल कर आत्मसात करना होता हैं आजकल आत्मसात नही करते केवल कराने पर प्रवचनकार ध्यान देते हैं ध्यान रहे जिसका वरण  भक्ति मुक्ति होगा वही सही सही मार्गदर्शन कर पाने में समर्थ होगा ये बाते कुम्भ मेंले में आये डिजिटल बाबा ने साझा किया आपको बता दे  बाबा जी दिखने में इतने आकर्षक हैं कि जिस जगह से गुजरते , वहा के लोगो को अपनी अदा बोली भाषा ज्ञान व्यवहार से हर पीढ़ी को अपना दीवाना बना लेतेउत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पले बड़े इस युवा संन्यासी में जीवन को जानने समझने के दिशा में बचपन से ही प्रबल जिज्ञासा व्याप्त थी। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बी काम की पढाई करने के दौरान संसार की लौकिक उपलब्धियों से हट कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो गयेवर्ष 2008 नवम्बर में अयोध्या के लोमश आश्रम के महंत स्वामी शिवचरण दास महाराज से दीक्षा प्राप्त कर वैरागी बन गये और आज हमारे बीच आप स्वामी राम शंकर के नाम से जाने जाते है।सोशल मीडिया में स्वामी जी युवाओ के मध्य डिजिटल बाबा के रूप में बेहद लोकप्रिय है।  स्वामी राम शंकर कहते है कि आज के युवापीढ़ी को अपने साथ जोड़ने का सबसे प्रभावी साधन सोशल मीडिया है इसी कारण हम इस पलेटफार्म पर सक्रियता से उपलब्ध रहते है।

स्वामी राम शंकर फेसबुक पर इतने लोकप्रिय है कि इनके एक फेसबुक मित्र जो सिंगापुर में रहते है इस वर्ष जब होली में भारत आये तो स्वामी जी के लिये iPhone6 ला कर उपहार स्वरूप भेट प्रदान किये। स्वामी राम शंकर बताते है कि वर्ष 2013 में एक कैनेडा की महिला से हमारी भेट हुयी जिसने पहली मुलाकात में ही उन दिनों मुझे Macbook Pro भेट किया। मजेदार बात ये है कि इन दोनों को उपयोग करते हुये हमें जब आज का युवा देखता हैं तब वो हमारे प्रति एक कौतुहल का भाव प्रगट करता है इतना ही नहीं वो पास आकर हमसे बात भी करता है। फेसबुक, व्हाट्सप्प,यूट्यूब पर जुड़ कर मेरे विचारो को भी पढता -सुनता रहता हैं। 

स्वामी राम शंकर अपने विषय में बताते हुये कहते हैं मूल रूप से हम एक घुमंतू साधक है स्थायी रूप से एक जगह टिक कर रहना मुझे तनिक भी पसंद नहीं है मेरा मानना है कि जीवन के यथार्थ का दिग्दर्शन केवल भ्रमण देशाटन में ही संभव हो पता है एक जगह रूकने का अर्थ है अपनी क्षमताओं को समेट देना।

योग अभ्यास में कुशल स्वामी राम शंकर कहते है कि योग आत्मकल्याण का साधन है, हर व्यक्ति को योग अभ्यास अनिवार्य रूप से प्रतिदिन करते रहना चाहिये पर ध्यान रहे योग में ध्यान की अवस्था अनिवार्य है।अन्यथा केवल शारीरिक श्रम और देह के स्तर पर हमें लाभ प्राप्त होगा जो जीवन की सार्थकता हेतु पर्याप्त नहीं है। योग के अभ्यास द्वारा आत्मा की गहराई में उतर कर स्वयं को जानने हेतु पुरुषार्थ करना चाहिये।  

हिमालय के लिये स्वामी राम शंकर के भीतर गज़ब की दीवानगी है इसी कारण हिमाचल कांगड़ा जिले के बैजनाथ में जा बसे अधिकतर  समय यही रह कर साधना करते है 
स्वामी जी कहते है बाहर चाहे कितना भी घूम लो विषयो के आनंद से स्वयं को सींच लो पर जब तक ब्रम्हानंद का रस नहीं चखे तब तक जीवन में तृप्ति का आभाव बना रहेगा संसार चक्र में आवागमन चलता रहेगा। 

ये मानव तन केवल हरिकृपा से सुलभ होता है अब जब मिल गया है तो इस जीवन को समझने के लिये हरपल सतसंग साधू संग करते रहिये अन्यथा ये अमूल्य जीवन हमारे हाथ से निकल जायेगा और हम अंत समय पछताते रह जायेंगे। एक ही परमपिता परमेश्वर है। उसके नाम रूप में भिन्नता है पर सभी नाम रूपों में हमारा मालिक एक ही है, जो हमारे भीतर अन्तर्यामी रूप से विद्यमान है इस भाव को बना कर अपने तन में ही उस मालिक का अनुभव करें।

स्वामी राम शंकर दास महाराज का जन्म 1 नवम्बर सन् 1987 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के ग्राम खजुरी में हुआ गोरखपुर में स्थित योगी आदित्यनाथ जी के शिक्षण संस्थान महाराणा प्रताप इण्टर कालेज गोलघर से बारहवीं तक एवं पण्डित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से बी.काम. तक की पढाई वर्ष 2009 में आप ने सम्पन्न किया।

 आध्यात्मिक जीवन का आरम्भ ……

वैराग्य प्रबल होने के कारण 11 नवम्बर वर्ष 2008 को अयोध्या धाम में स्थित लोमश आश्रम के महन्त स्वामी शिवचरण दास महाराज द्वारा वैष्णव परम्परा में आपको वैराग्य-संन्यास की दीक्षा प्राप्त हुआ ।

स्वामी राम शंकर जी के भीतर सनातन धर्म के शास्त्रो के अध्ययन की उत्कट इच्छा रही जिसके कारण आप दर्शनयोग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात, कालवा गुरुकुल जीन्द हरियाणा,चिन्मय मिशन द्वारा संचालित गुरुकुल सांदीपनि हिमालय, तपोवन कांगड़ा हिमाचल,बिहार स्कूल ऑफ़ योग के रिखिया पीठ देवघर झारखण्ड, कैवल्य धाम योग विद्यालय लोनावला महाराष्ट्र व इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ छत्तीसगढ़ में रह कर 8 वर्ष तक वेद – उपनिषद, रामायण,भगवद्गीता,योगशास्त्र व संगीत का गहन अध्ययन किया है।

वर्तमान में श्री रामकथा का वाचन कर देश भर में संस्कार व आध्यात्मिक ज्ञान को अत्यंत सरलता, सरसता व सुबोधगम्यता से युवा पीढ़ी जिज्ञासु जन को सुना समझा कर आत्मसात करा रहें हैं।
सबसे खास बात ये है कि आप मठ मंदिर, आश्रम निर्माण के क्षेत्र में तनिक भी रूचि नहीं रखते, आप मानते है की इन उपक्रमो में हमारे समय की सबसे अधिक बर्बादी होती है न जाने श्वास कब बन्द हो जाये कुछ भी पता नहीं है इस लिये जब तक श्वास चले तब तक जीवन में सार्थक कार्य हरि-चर्चा, हरि-सुमिरन करे व कराये इसी में जीवन की सार्थकता है

स्वामी राम शंकर अपने कार्यशैली व अनूठे व्यक्तित्व के कारण सोशल मीडिया में युवा वर्ग के सबसे चहेते सन्त है।स्वामी राम शंकर देश भर में घूमते रहते है और रास्ते में पड़ने वाले पड़ावों के प्रेरक विषयो का खुद ही वीडियो बना कर यूट्यूब और फेसबुक पर अपडेट व फेसबुक लाइव करते रहते है इसी खूबी के कारण स्वामी राम शंकर को सोशल मीडिया में डिजिटल बाबा के नाम से भी पुकारा जाता हैं।   

श्वेता मिश्रा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here