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भीम ने महाभारत युद्ध में दु:शासन का खून पिया, क्या ये उचित था?

जीवन मंत्र (TV News India): महाभारत युद्ध में पांडवों ने कौरवों को पराजित कर दिया था। कौरव पक्ष के सभी योद्धा मारे जा चुके थे। अंत में भीम ने दुर्योधन को भी गदा युद्ध में हरा दिया और उसकी मृत्यु हो गई थी। युद्ध समाप्त के बाद सभी पांडव श्रीकृष्ण के साथ धृतराष्ट्र और गांधारी से मिलने पहुंचे थे।

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> धृतराष्ट्र और गांधारी अपने पुत्रों की मृत्यु पर बहुत दुखी थी। ऐसे में सभी पांडव उनके सामने डरते-डरते पहुंचे थे। जब दुर्योधन के वध की बात निकली तो भीम ने कहा कि अगर में अधर्मपूर्वक दुर्योधन को पराजित नहीं करता तो वह मुझे मार डालता। अगर सही नियमों का पालन करते हुए युद्ध होता तो दुर्योधन से कोई भी यौद्धा जीत नहीं सकता था।
> गांधारी ने कहा कि तुमने युद्ध में मेरे पुत्र दु:शासन का खून पिया था, क्या ये उचित था? तब भीम ने कहा कि जब भरे दरबार में दु:शासन द्रोपदी को बाल पकड़कर लाया था, तभी मैं प्रतिज्ञा की थी कि मैं दु:शासन के रक्त का पान करूंगा। युद्ध में दु:शासन का रक्त मेरे दांतों से आगे नहीं गया था, अगर में ये नहीं करता तो क्षत्रिय धर्म का पालन नहीं कर पाता।
> भीम के बाद गांधारी से बात करने के लिए युधिष्ठिर पहुंचे, उस समय गांधारी बहुत क्रोधित थी। गांधारी की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी, उस पट्टी में से जब गांधारी ने युधिष्ठिर के पैरों के नाखून को देखा तो वे काले पड़ गए। ये देखकर अर्जुन श्रीकृष्ण के पीछे छिप गए और नकुल-सहदेव भी वहां से हट गए। कुछ देर बाद गांधारी का क्रोध शांत हुआ, तभी सभी पांडवों ने गांधारी से आशीर्वाद लिया।

Posted By: Priyamvada M

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