रेलवे बोर्ड ने वापस लिया फैसला.. पटरियों पर दौड़ती रहेगी गरीब रथ

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*:-देश भर में विरोध के बाद 52 गरीब रथ ट्रेनों को साधारण एक्सप्रेस में बदलने की योजना रद्द की

*:-काठगोदाम से कानपुर और जम्मूतवी जाने वाली गरीब रथ चार अगस्त से बहाल होगी

:-पहले चरण में बंद हुई थीं ये दोनों ट्रेनें, कोचों की कमी को बनाया था फैसले का आधार

भारतीय रेल{TV News  India:-}बरेली। काठगोदाम से कानपुर और जम्मूतवी जाने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस को बंद करने का अपना फैसला रेलवे बोर्ड ने वापस ले लिया है। बोर्ड ने पहले 15 जुलाई से दोनों ट्रेनों को एक्सप्रेस ट्रेन के तौर पर चलाने का फैसला लिया था लेकिन शुक्रवार को बोर्ड ने एलान किया कि ये ट्रेनें चार अगस्त से पहले की तरह चलाई जाएंगी। देश भर में चलने वाली बाकी 26 जोड़ी गरीब रथ ट्रेनों को भी पहले की तरह चलाया जाता रहेगा।
गरीबों को कम कीमत पर एसी कोच में सफर कराने के लिए 2006 में गरीब रथ ट्रेनों की शुरुआत की गई थी लेकिन कुछ समय पहले रेलवे ने इन ट्रेनों को एक के बाद एक मेल एक्सप्रेस ट्रेन में बदलना शुरू कर दिया। इस फैसले के पीछे रेलवे ने कोच की कमी होने का तर्क दिया था। यह भी कहा था कि देश में गरीब रथ के कोच बनना बंद हो गए हैं। जो कोच दौड़ रहे हैं वे 14 साल से अधिक पुराने हैं। इन्हें और नहीं दौड़ाया जा सकता। रेलवे के इसी फैसले के तहत सबसे पहले काठगोदाम और जम्मू तवी के बीच चलने वाली गरीब रथ (12207/08) और कानपुर-काठगोदाम के बीच चलने वाली (12209/10) को बंद कर नॉर्दन रेलवे ने एक्सप्रेस ट्रेन के तौर पर चलाना शुरू कर दिया। हाल ही में गरीब रथ ट्रेनों के एक्सप्रेस के तौर पर चलाने के फैसला का देश भर में विरोध होने पर रेलवे बोर्ड ने शुक्रवार को यह फैसला वापस ले लिया।
रेलवे के एक उच्चपदस्थ अधिकारी ने बताया कि जिन रूटों पर रेलवे प्रशासन ने गरीब रथ बंद की हैं, उन पर चार अगस्त से दोबारा यह सेवा शुरू कर दी जाएगी।

सहरसा-अमृतसर के बीच दौड़ी थी पहली गरीब रथ

तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में गरीब रथ नाम से शुरू हुई पहली महत्वाकांक्षी ट्रेन सहरसा से अमृतसर के बीच पांच अक्तूबर 2006 को चलाई गई थी। 12 बोगियों वाली यह ट्रेन एसी थ्री चेयरकार थी। इसकी अधिकतम गति 140 किमी प्रति घंटा थी। बाद में इन्हें स्लीपर में तब्दील कर दिया गया।

मेल से 40 फीसदी कम होता है किराया

गरीब रथ का किराया मेल के थ्री टियर किराए से भी 40 फीसदी कम होता है। यात्री को खानपान और बेड रोल के लिए अलग किराया देना पड़ता है। एक बेड रोल का किराया 25 रुपये होता है। इस किराए में यात्री को एक तकिया, एक कंबल और दो सफेद चादरें दी जाती हैं।

रेलवे की प्लानिंग फेल

रेलवे प्रशासन की प्लानिंग थी कि देश भर में दौड़ रहीं सभी 26 जोड़ी गरीब रथ एक्सप्रेस को बंद करके उन्हें सामान्य एक्सप्रेस में बदल दिया जाए। इससे रेलवे को 40 फीसदी अतिरिक्त किराया तो मिलता ही, साथ में ट्रेन में 12 के स्थान पर कोच भी बढ़कर 16 हो जाते। इन 16 कोचों में थर्ड एसी, सेकेंड एसी, स्लीपर और जनरल कोच लगाना प्रस्तावित था

POSTED by:-Ashish Jha

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