वीजी सिद्धार्थ: क्या टैक्स और कर्ज़ के ‘आतंक’ ने ली जान?

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मंगलुरू (TV News India):वीजी सिद्धार्थ सोमवार की शाम से लापता थे और उनका शव बुधवार सुबह मंगलुरु के बाहर नेत्रावती नदी से निकाला गया. उनका अंतिम संस्कार मुदीगेरे, चिक्कमंगलुरु में परिवार की कॉफ़ी एस्टेट में किया गया. ये वही जगह है जहां से उन्होंने भारत में कॉफ़ी पीने की संस्कृति को बढ़ावा दिया.

कैफ़े कॉफ़ी डे परिवार के निदेशक मंडल को लिखे गए उनके पत्र में कुछ संदेह के बादल छाए हुए लगते हैं. हालांकि पुलिस ने इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि की है क्योंकि उनके परिवार ने भी इसकी पुष्टि की है.
एक होल्डिंग कंपनी यानी कॉफी डे एंटरप्राइज़ेज़ जिनकी सहायक कंपनियां कॉफी व्यवसाय, आतिथ्य, एसईज़ेड टेक्नोलॉजी पार्क, निवेश परामर्श जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं और दूसरा कर्ज़ व्यक्तिगत था.

नाम ना बताए जाने की शर्त पर एक चार्टर्ड एकाउंटेंट बताते हैं, “इसके कई पहलू हैं. पहला यह है कि कंपनी के स्तर के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी कर्ज़ लिया गया. उन्होंने कंपनी के शेयरों को गिरवी रख दिया और कर्ज़दाताओं के भारी दबाव में आ गए. कंपनी के शेयर की कीमत बाज़ार में लगभग रोज़ घट रही थी.”
नाम ना बताए जाने की शर्त पर पूर्व नौकरशाह कहते हैं, ”सिद्दार्थ के साथ एक धोखेबाज़ की तरह का बर्ताव किया गया, उनके हाथ पांव बांध दिए और कुछ नहीं करने दिया गया और उनके पूरे व्यवसाय को ध्वस्त कर दिया गया. 300-400 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी के लिए, आप 12,000 करोड़ रुपये के उस उद्योग को बर्बाद नहीं करेंगे, जिससे 30,000 परिवारों की रोज़ी रोटी चलती हो. ये इसे संभालने का पूरी तरह से संवेदनहीन तरीका है.”
एक और नौकरशाह ने कहते हैं,”सिद्धार्थ नरम दिल वाले थे. वह सरकारी कार्रवाई के नाम पर अपने उद्यम को मरता हुआ नहीं देख सकते थे और यही वह जगह है जहां उन्होंने दम तोड़ दिया, ”
मौत से पहले लिखे गए पत्र में सिद्दार्थ की अंतिम पंक्तियाँ थीं, ”मेरा इरादा कभी किसी को धोखा देने या गुमराह करने का नहीं था, मैं एक उद्यमी के रूप में असफल रहा हूं. यह मेरी ईमानदार स्वीकारोक्ति है. उम्मीद है कि किसी दिन आप मुझे समझेंगे और माफ़ करेंगे. ”

POSTED by:-Ashish Jha

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