एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी के लिए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी आवश्यक भले ही आरोपी इससे इंकार ही क्यों ना करे :दिल्ली हाईकोर्ट।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को फिर कहा कि मादक द्रव्य और नशीले पदार्थ अधिनियम, 1985 (एनडीपीएस अधिनियम) की धारा 50 के तहत किसी आरोपी की तलाशी किसी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में होनी चाहिए भले ही आरोपी इस प्रस्ताव से इंकार ही क्यों ना कर दे। निचली अदालत के आदेश से दुखी अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की और कहा कि तलाशी की अपनाई गई प्रक्रिया दोषपूर्ण थी। आरोपी पर 100 ग्राम गाँजा रखने का आरोप है। प्रतिवादी-अभियोजन ने कहा कि अपीलकर्ता को यह बताया गया था कि मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में तलाशी की माँग करने का उसका अधिकार है। अपीलकर्ता ने ख़ुद ही इससे इंकार कर दिया था जिसके बाद अपीलकर्ता की जाँच अधिकारियों द्वारा तलाशी ली गई और इस तरह यह अपील निराधार है। प्रतिवादी ने अपनी दलील के लिए विजयसिंह चंदुभा जडेजा बनाम गुजरात राज्य, (2011) 1 SCC 609 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को आधार बनाया जिसमें कहा गया था कि अगर आरोपी ने धारा 50 के तहत उसके अधिकारों के बारे में बताए जाने के बावजूद लिखित में इस बात की अनुमति दी है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा उसकी तलाशी ली जाए तो इसका अर्थ यह हुआ कि धारा 50 का पूरी तरह पालन हुआ है। उक्त फ़ैसले पर न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा कि जिस तलाशी में मादक द्रव्यों की बरामदगी होती है वैसी तलाशी आवश्यक रूप से मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होनी चाहिए। अगर आरोपी इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है तो भी इसका पालन ज़रूरी है। इस बारे में उन्होंने आरिफ़ खान बनाम उत्तराखंड राज्य मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर भरोसा किया। अपीलकर्ता की पैरवी एडवोकेट एसबी दंडपानी ने की जबकि प्रतिवादी का पक्ष एएपी मीनाक्षी चौहान ने रखा।

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