बॉलीवुड पर नहीं मंदी का असर

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बॉलीवुड (TV News India): देश में जहां ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और बाकी सेक्टर मंदी की मार से घिरे हैं, वहीं बॉलीवुड अब तक मंदी से अप्रभावित है। इसकी पुष्टि आंकड़े कर रहे हैं। जनवरी से लेकर अब तक करीब दस फिल्में 100 करोड़ क्लब में शामिल हो चुकी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने 40 से ज्यादा किताबों के राइट्स लिए हैं। उन पर वेब शोज बनाए जा रहे हैं। इनमें से 80 फीसदी तो अकेले सिद्धार्थ जैन ने अपनी कंपनी ‘द स्टोरी इंक’ से डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ डील करवाई है।

पहले दिन ‘साहो’ के हिंदी वर्जन की 84 लाख टिकट

  1. ट्रेड पंडित बॉलीवुड के मंदी से अप्रभावी होने के आंकड़े सिलसिलेवार तौर पर बताते हैं। वे टिकटों की एडवांस बुकिंग की ओर ध्यान दिलाते हैं। वे कहते हैं, “ओपनिंग डे पर ही ‘साहो’ के हिंदी वर्जन की 84 लाख टिकटें एडवांस में बुक हुई थीं। कमजोर रिएक्शन मिलने के बाद भी लोग इसे देखने उमड़ते रहे। ‘मिशन मंगल’ की पहले ही दिन पौने दो करोड़ टिकटें बुक हुईं थीं। ‘भारत’ फिल्म की ओपनिंग डे पर डेढ़ करोड़ बुक हुई थीं। ‘केसरी’ और ‘कबीर सिंह’ की ओपनिंग डे पर 45 लाख से ज्यादा टिकटें बुक हुईं थीं।
    1. ‘कबीर सिंह’ ने इन्हीं आंकड़ों के साथ 276 करोड़ का कलेक्शन कर जो इतिहास रचा, वह सब जानते हैं। मंदी के दिनों में भी ‘मिशन मंगल’ 175 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस कर चुकी थी। ‘बाटला हाउस’ भी तेजी से 100 करोड़ की कमाई करने के करीब पहुंच रही है।”
    2. ट्रेड पंडित बताते हैं, ‘उरी के वक्त तो आम लोगों में एक अलग जोश था। लोकल ट्रेन में सफर करते वक्त मोबाइल फोन पर देखने वालों को आड़े हाथों लिया जाता था। साफ कहा जाता था कि सिनेमाघर में ही जाकर देखो। आलम यह रहा कि फिल्म कई महीने सिनेमाघर में रही। कलेक्शन के नए रिकॉर्ड बनाए। महज 1700 स्क्रीन पर रिलीज होते हुए उसने 244 करोड़ किए।”
    3. ‘लोग खुशी-गम दोनों में ही फिल्में देखते हैं’

      जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेस के सीईओ शारिक पटेल कहते हैं, “बॉलीवुड के अप्रभावी रहने की वजह यह है कि लोग खुशी में भी फिल्म देखने जाते हैं और गम भुलाने के लिए भी वे एंटरटेनमेंट का सहारा लेते हैं। आंकड़े इसके गवाह हैं। 2008 की मंदी के बावजूद ‘गजनी’ इंडिया की पहली सौ करोड़ क्लब वाली फिल्म बनी थी। ऋतिक की ‘काइट्स’ को तब 150 करोड़ में एक कॉरपोरेट स्टूडियोज ने खरीदा था।”

    4. ‘चिंताओं-चुनौतियों से दूर ले जाता है सिनेमा’

      पिछले साल 80 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन करने वाली ‘सत्यमेव जयते’ के डायरेक्टर मिलाप जावेरी कहते हैं, “सिनेमा लोगों को उनकी जिंदगी से दूर ले जाता है। हाथों में पॉपकॉर्न लिए सिनेमा देखते हुए वे अपनी चिंताएं, चुनौतियां भूल जाते हैं।”

    5. नोरा फतेही, अक्षय खन्ना भी जताई निश्चिंतता

       

      डांसर और एक्ट्रेस नोरा फतेही कहती हैं, “फिल्मों का बिजनेस प्रभावित नहीं होने वाला है। वह इसलिए कि इसमें काफी इनवेस्टमेंट हो रहा है। बाकी बिजनेस वाले भी इसमें खासा निवेश कर रहे हैं।” सालों से इंडस्ट्री में सक्रिय अक्षय खन्ना भी निश्चिंत हैं कि इंडस्ट्री का मंदी कुछ बिगाड़ने वाली नहीं है।

    6. कॉम्पिटिशन से फायदा

      फिल्मों को सबसे ज्यादा फायदा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आपसी कॉम्पिटिशन से है। बड़ी और क्रेडिबल फिल्में पाने वे मोटी रकम दांव पर लगा रहे हैं। उनका नेटवर्क विदेशों में भी है। वहां से मिले पॉजिटिव रिस्पॉन्स के चलते अब हिंदी की फिल्में भी 60 से ज्यादा देशों में रिलीज हो रही हैं।

    7. अलर्ट हुए प्रोड्यूसर्स

      पीवीआर, कार्निवल जैसे सिने चैन से जुड़े लोग और एग्जीबिटर्स कहते हैं, ‘कॉरपोरेट स्टूडियोज और प्रोड्यूसर्स अलर्ट हुए हैं। वे प्रमोशन की फिजूलखर्ची से बच रहे हैं। वे छोटे बजट की क्रेडिबल फिल्मों पर ध्यान दे रहे हैं। मिसाल के तौर पर खुद सलमान अपनी फिल्मों का बजट 70 से 80 करोड़ का रख रहे हैं। ताकि रिकवरी में दिक्कत न हो। अक्षय भी सलमान की लीक पर चल पड़े हैं। ‘मिशन मंगल’ का बजट उन्होंने 32 करोड़ ही रखा।”

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