बार काउंसिल ने वकीलों के नामांकन के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की अनिवार्यता किया समाप्त ।

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बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा ने फैसला किया है कि वकील के रूप में नामांकन करवाने के लिए पुलिस सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रकार बार काउंसिल ने वकील के रूप में नामांकन के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। अविनाश जनार्दन भिडे, अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा ने लाइव लॉ से बात करते हुए पुष्टि की कि ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन करवाने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की अनिवार्यता को हटा दिया गया है। 15 सितंबर, 2019 को अपनी आम सभा में स्टेट बार काउंसिल ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव पर विचार किया, जिसमें कहा गया था कि पुलिस सत्यापन की अनिवार्यता के कारण विभिन्न कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। एबीवीपी ने राज्य बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ता पारिजात पांडे को एक पत्र लिखकर कहा कि पुलिस सत्यापन के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता कानून के छात्रों पर मानसिक और वित्तीय तनाव डालती है। उक्त विषय पर चर्चा आयोजित करने के बाद, बार के सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया,

इसमें कहा गया है- “अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 24 के प्रावधानों पर विचार करते हुए और स्टेट बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा द्वारा पारित नियमों पर विचार करते हुए, साथ ही वी सुधीर बनाम स्टेट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मामले में निर्धारित कानून पर भी विचार करते हुए यह तय किया गया है कि अधिवक्ता अधिनियम की धारा 6 के तहत स्टेट बार काउंसिल पूर्ण योग्यता और अधिकार से कानून के स्नातकों के नामांकन से पहले स्टेट बार काउंसिल की ओर से पुलिस सत्यापन की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।”

प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे या मामलों के विवरण के साथ एक हलफनामा वकील के रूप में नामांकन के इच्छुक लॉ ग्रेजुएट को आपराधिक रिकॉर्ड के सत्यापन के साथ स्टेट बार काउंसिल में देना होगा।

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