अयोध्या केस: CJI ने UP के मुख्य सचिव-डीजीपी से कानून-व्यवस्था की ली जानकारी

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अयोध्या (TV News India): अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर कयासों का दौर अपने चरम पर है। 17 नवंबर से पहले कभी भी सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है। अयोध्या विवाद में फैसले से पहले सीजेआई रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी और मुख्य सचिव से राज्य के हालात पर अपडेट लिया। सीजेआई ने यूपी के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी को मुलाकात के लिए आज दिल्ली तलब किया था। उन्होंने अपने चेंबर में यूपी के दोनों शीर्ष अधिकारियों से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जानकारी ली।

चीफ जस्टिस के साथ दोनों अधिकारियों की यह मीटिंग करीब डेढ़ घंटे तक चली। बताया जा रहा है कि अयोध्या केस पर बनी संवैधानिक पीठ में शामिल सभी पांचों जज इस बैठक में मौजूद रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में चीफ जस्टिस ने पूछा कि अयोध्या और यूपी के अन्य संवेदनशील इलाकों में मौजूदा स्थिति क्या है? क्या धार्मिक नेताओं को विश्वास में लिया गया है? पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए किस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं? केंद्र और राज्य सुरक्षा व्यवस्था पर समन्वय कर रहे हैं या नहीं? अयोध्या विवाद पर फैसले को लेकर योगी सरकार से लेकर पूरा प्रशासनिक अमला हाई अलर्ट पर आ चुका है।

इस कड़ी सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या के फैसले को देखते हुए सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी की गई है। सभी राज्यों को फैसले को लेकर अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक अतिरिक्त सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय अर्धसैनिक बलों की 40 कंपनियां भेज रहा है। इन 40 कंपनियों में 4000 पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान शामिल होंगे।

अयोध्या के फैसले के मद्देनजर प्रशासन अलर्ट पर है। पुलिस ने ज़िले को 5 सेक्टर में बांटा है। अलग-अलग सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। उपद्रव के दौरान पकड़े जाने वाले लोगों के लिए 5 अस्थाई जेल बनाई गई है। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर गांव गांव गली गली मोहल्ले मं पुलिस मित्रों को भी तैनात किया गया है जो पुलिस के साथ मिलकर शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करेंगे। पुलिस के अनुसार आने वाले फैसले के मद्देनजर बिजनौर में दो कंपनी अर्धसैनिक बल पहुंच गए हैं और कुछ आने बाकी हैं। पीएससी भी मौजूद है, इसके अलावा फोर्स को भी अलर्ट मोड़ पर रखा गया है। किसी भी उपद्रव से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनपद को दो सुपर जॉन और 5 सेक्टर जोन में बांटा गया है हर सेक्टर में एक-एक मजिस्ट्रेट और एक-एक सर्किल अफसर को तैनात किया गया है। अर्धसैनिक बल पुलिस पीएसी फोर्स के साथ-साथ 5 अस्थाई जेल बनाई गई हैं।

जिसमें चांदपुर के हिंदू इंटर कॉलेज सहित पांच कॉलेजों को अस्थाई जेल के लिए अधिकृत कर लिया गया है और किसी बड़े हमले से निपटने के लिए कमांडो को भी तैयार रखा गया है। इसके अलावा एक अयोध्या सेल का गठन किया गया है जिसमें एक गजेटेड ऑफिसर और एक इंस्पेक्टर को तैनात किया गया है। जो जिले में होने वाली सभी गतिविधियों और शासन से आने वाले आदेशों की मॉनिटरिंग कर रहा है। फिरोजाबाद में अयोध्या के फैसले को लेकर पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल किया गया। जिले के कई अधिकारी मॉक ड्रिल में शामिल हुए। बताया जा रहा है कि ये रिहर्सल दंगा नियंत्रण को लेकर था। उधर अम्बेडकर नगर के पुलिस लाइन में मॉकड्रिल के दौरान एसपी के हाथ में लगी चोट लग गई। जिसके बाद जिला अस्पताल में उनका इलाज कराया गया। अपर पुलिस अधीक्षक के हाथ और आंख में भी चोट लगी है। उधर रायबरेली में अयोध्या फैसले को लेकर जिला प्रसाशन एलर्ट मोड़ में है। सभी अधिकारियों और पुलिस प्रशासन के साथ डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी स्वप्निल ममगाईं ने बैठक की है। सभी विभागीय कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गये है।

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